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संगीत गुरु को आदरांजलि देने 10 साल से हर माह मना रहे गुरु पूर्णिमा

रायपुर: वैसे तो हर शिष्य अपने गुरुदेव का स्मरण साल में एक बार गुरु पूर्णिमा पर करते ही हैं, लेकिन राजधानी के प्रतिष्ठित संगीत गुरु स्व. गुणवंतलाल व्यास के शिष्य हर माह गुरु पूर्णिमा मनाते हैं। बूढ़ापारा स्थित उनके निवास पर प्रत्येक गुरु पूर्णिमा पर शिष्यगण एकत्रित होते हैं, उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण करके उन्हें याद करते हुए शास्त्रीय गायन-वादन के जरिए आदरांजलि देते हैं। हर माह आदरांजलि देने का यह सिलसिला लगभग 10 साल से चल रहा है।

अंतिम इच्छा थी संगीत की अलख जलती रहे

संगीत गुरु स्व. गुणवंतलाल ने अपना पूरा जीवन संगीत के लिए समर्पित कर दिया। उनके शिष्य बताते हैं कि शास्त्रीय संगीत के प्राय: हर वाद्य यंत्र को वे बखूबी बजाते थे। अपने जीवनकाल में उन्हाेंने सैकड़ों शिष्यों को संगीत की शिक्षा दी। अंतिम समय में उनकी इच्छा थी कि संगीत की स्वर लहरी हमेशा गूंजती रहनी चाहिए। गुरु की इच्छा के अनुरुप शिष्यगणों ने तय किया कि हर माह संगीत का आयोजन करेंगे। साल 2011 में गुरु के अवसान के बाद प्रत्येक माह गुरु पूर्णिमा मनाने का सिलसिला शुरू हुआ।

तेरहवीं तक प्रत्येक दिन संगीत से दी थी श्रद्धाजंलि

वर्ष 2011 में गुरु के स्वर्गारोहण पर उन्हें श्रद्धाजंलि देने पूरे 13 दिनाें तक राजधानी के अनेक दिग्गज संगीतकारों ने प्रस्तुति दी थी। प्रमुख संगीतकारों में पद्मश्री भारती बंधु, मदन चौहान जैसे कई संगीतकार और शिष्यों ने प्रतिदिन भजन-कीर्तन से श्रद्धाजंलि दी थी।

कोरोना काल में हर सप्ताह आनलाइन प्रसारण

गुरु से शिक्षा लेने वाले उनके शिष्य पुत्र दीपक व्यास बताते हैं कि संगीत की बयार वर्षभर बहती रहने की गुरु की अंतिम इच्छा का पालन कोरोना काल में भी अनवरत चलता रहा। उनकी याद में गठित गुनरस पिया फाउंडेशन के माध्यम से हर रविवार को संगीत का ऑनलाइन आयोजन किया जा रहा है। इसमें बनारस, कोलकाता, इंदौर, पटना, मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों के शास्त्रीय गायक, वादक प्रस्तुति दे रहे हैं। एक साल से हर सप्ताह अब तक 55 कलाकारों की प्रस्तुति का ऑनलाइन प्रसारण किया जा चुका है।

शिष्य जो जुटते हैं हर माह

राजधानी की शुभ्रा ठाकुर, नीता डूमरे, प्रज्ञा त्रिवेदी, नीलिमा मिश्रा, मीरा शर्मा, रचना चांडक, मनीषा त्रिवेदी, गार्गी काले, जगदीश पाठक, आबिद अली, दीपक व्यास, डा.नवीन गुप्ता, नारायण ठाकुर, ओमप्रकाश भोई, गिरीश काले, निर्झर चांडक, सुरेंद्र साहू, अतीक उर रहमान, डा. विवेक अवस्थी आदि शिष्य हर महीने गुरु को याद करते हुए संगीत की सुरधारा बहाते हैं।

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