किसानों के मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक सरकार को घेरेगी भाजपा

रायपुर। प्रदेश में खरीफ सीजन शुरू होने के साथ किसानों को लेकर सियासत तेज हो गई है। आगामी चुनाव में माइलेज हासिल करने के लिए भाजपा किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार को सड़क से लेकर सदन तक घेरने की तैयारी में है। किसान मोर्चा 26 जुलाई को प्रदेश सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेगी। इसी दिन से विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। सदन के अंदर पार्टी के विधायक यह मुद्दा उठाएंगे।
इधर, पूर्व कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य सरकार पर खाद की कालाबाजारी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में शनिवार को प्रेसवार्ता में पूर्व कृषि मंत्री व भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल और किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम बिहारी जायसवाल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि बारिश कम होने के कारण खेतों में दरार पड़ रही है, लेकिन सरकार बांधों से पानी नहीं दे रही है। किसानों को पलायन के लिए विवश होना पड़ रहा है। पूर्व मंत्री अग्रवाल ने कहा कि आमतौर पर बारिश के सीजन में किसान खेती किसानी के लिए गांव लौटते हैं, लेकिन इस बार किसान पलायन कर रहे हैं। जांजगीर-चांपा व मुंगेली जैसे जिलों से सबसे ज्यादा किसान पलायन कर रहे हैं।
अग्रवाल ने खाद की कमी को लेकर सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि उसने केंद्र सरकार से कितने खाद की मांग की थी। अग्रवाल ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने राज्य की मांग से ज्यादा खाद दिया है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री तीन लाख टन अतिरिक्त खाद की मांग क्या कालाबाजारी के लिए कर रहे हैं। राज्य सरकार ने किसानों से ज्यादा खाद की आपूर्ति निजी व्यापारियों को की है। यूरिया की पांच टन की मांग की थी पिछले साल एक लाख टन का स्टाक था फिर भी इसकी कमी क्यों हो रही है
खाद की कमी नहीं फिर भी कालाबाजारी
अग्रवाल ने कहा कि नीम कोटेट यूरिया की कालाबाजारी खत्म हो गई है फिर राज्य में इसकी कमी क्यों हो रही है। 76 हजार टन खाद जुलाई तक स्टाक में था, फिर इसकी कमी क्यों हो रही है ? किसानों को यह खाद क्यों नहीं दिया जा रहा है?
गोबर में मिट्टी मिलाकर बेच रहे
अग्रवाल ने आरोप लगाया कि दो रुपये किलो में गोबर खरीदा जा रहा है, उसमें मिट्टी मिलाकर दस रुपये में खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। राज्य सरकार गोबर खाद के जरिये अपना खजाना भरने की कोशिश कर रही है।