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दूसरी लहर में छत्तीसगढ़ के प्राइवेट अस्पतालों में मृत्युदर सर्वाधिक 17 फीसद

रायपुर: राज्य के प्राइवेट अस्पतालों में दूसरी लहर के बीच कोरोना से मृत्युदर जहां 17.3 फीसद रहा। वहीं एम्स में 13.6 और सरकारी अस्पतालों में 11.8 फीसद पर था। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक प्रदेश में 18 मार्च 2020 को पहला केस सामने आने के बाद अब तक 10 लाख से अधिक संक्रमित सामने आए हैं। इसमें 9.86 लाख से अधिक स्वस्थ हुए हैं। 13,523 लोगों की मौत हुई है। इसमें मृत्युदर 1.34 फीसद पर रहा। स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालाें की तुलना में प्राइवेट में सर्वाधिक मृत्युदर बताया है। ऐसे में तीसरी लहर की तैयारियों के मद्देनजर अस्पतालों में व्यवस्था और मृत्युदर को रोकना चुनौती होगी। आशंकाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों से लेकर इलाज की व्यवस्था बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

प्रदेश में अब तक संक्रमण के मृत्युदर
वर्ष 2020 (18 मार्च से 31 दिसंबर तक)
अस्पताल – मृत्युदर
प्राइवेट अस्पताल – 6.3 फीसद
एम्स – 5.7 फीसद
शासकीय अस्पताल – 2.6 फीसद
वर्ष 2021 (1 जनवरी से 9 जुलाई)
अस्पताल – मृत्युदर
प्राइवेट अस्पताल – 17.3 फीसद
एम्स – 13.6 फीसद
शासकीय अस्पताल – 11.6 फीसद
राज्य में वर्ष 2020 दिसंबर तक संक्रमितों की स्थिति
अस्पताल – भर्ती – स्वस्थ – मृत्यु
शासकीय – 904228 – 83824 – 2429
प्राइवेट – 14363 – 12699 – 909
एम्स – 5501 – 5055 – 317

वर्ष 2021 नौ जुलाई तक की स्थिति
अस्पताल – भर्ती – स्वस्थ – मृत्यु
शासकीय – 52197 – 45313 – 6203
प्राइवेट – 20638 – 16981 – 3577
एम्स – 2309 – 1950 – 313
नोट : विधानसभा में जारी आंकड़े।

राज्य के प्रमुख पांच जिलों की स्थिति

जिले – केस – स्वस्थ – मौत
    • रायपुर – 1,57,678 – 154425 – 3138
    • दुर्ग -96,514 – 94,641 – 1792
    • बिलासपुर 65375 – 64075 – 1204
    • रायगढ़ – 62409 – 61354 – 976
    • जांजगीर चांपा – 57327 – 56363 – 825
पहली लहर से ज्यादा दूसरी लहर में डेथ रेट बढ़ा है। प्राइवेट अस्पतालों में मृत्युदर अधिक होने के क्या कारण है। इसमें बिंदुवार अध्ययन करने पर ही जानकारी हो पाएगी। सरकारी अस्पतालों में बेहतर व्यवस्था और इलाज से स्थिति पर काबू पाया गया।
-डा. सुभाष मिश्रा, राज्य कोरोना नियंत्रण अधिकारी
सरकारी अस्पतालों में मरीजों के आने पर तुंरत इलाज शुरू किया गया। जबकि प्राइवेट अस्पतालों में मरीज लेट पहुंच रहे थे। यहां इलाज में प्रशिक्षित स्टाफ की भी कमी थी। देखा गया कि गाइड लाइन पूरी ना करने वाले कई अस्पतालों को अनुमति दे दी गई थी।
-डा. आरके पंडा, विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, आंबेडकर अस्पताल
सरकार के पास क्रिटिकल केयर, आइसीयू बिस्तर की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। अधिक गंभीर रोगी प्राइवेट अस्पतालों में गए हैं। इसलिए मृत्युदर अधिक कह सकते हैं। लेकिन और बिंदुओं को देखने की जरूरत है।
-डा. राकेश गुप्ता, अध्यक्ष, स्टेट हास्पिटल बोर्ड

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