ब्रेकिंग
Ayodhya Ram Mandir Controversy: 'राम मंदिर कर्मचारियों की हो CDR जांच', अखिलेश यादव बोले- 99% लोग BJ... Old Delhi Redevelopment: 'शाहजहानाबाद पुनर्विकास निगम' का बदला नाम, अब 'इंद्रप्रस्थ विरासत पुनर्विका... Datia By-Election: दतिया में ASP के दामोदर यादव ने भरा नामांकन, क्षत्रिय समाज ने किया BJP का समर्थन Datia By-Election: नरोत्तम मिश्रा ने उपचुनाव से पहले दिखाई ताकत, सैकड़ों महिलाओं-युवाओं को दिलाई BJP... Chhattisgarh Police Transfer: पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 15 इंस्पेक्टर और 1 SI का तबादला, आदेश जार... Rajasthan Oil Production: बाड़मेर में खोदे जाएंगे 1000 नए तेल कुएं, 3 लाख बैरल प्रतिदिन क्रूड ऑयल उत... Yamuna Jal Pariyojana: शेखावाटी के लिए खुशखबरी! सीकर में खुलेंगे 3 नए कार्यालय, 46 पदों को भी मंजूरी Pakistan Water Crisis: पानी के लिए भारत पर आरोप लगाने वाले पाकिस्तान की खुली पोल, खुद की गलती से जल ... Haryana Super 100 Scheme: नायब सरकार ने बढ़ाईं 100 सीटें, 9 जुलाई से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया PM Modi in Melbourne: मेलबर्न में गूंजा 'भारत माता की जय', पीएम मोदी ने किया 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्...
देश

लॉकडाउन होने के बाद महिला आयोग में नहीं रुकी सुनवाई, एक साल एक हजार अधिक मामलों की सुनवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने पिछला एक साल का रिपोर्ट कार्ड उपलब्धियों से भरा रहा। गुरुवार को प्रेस वार्ता में महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने बताया कि एक साल के कार्यकाल में तीन बार के लॉकडाउन में कुल साढ़े पांच माह का लॉकडाउन रहा। कोरोना संक्रमण के दिशा-निर्देशों के तहत इस अवधि में जन सुनवाई नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि कुल साढ़े पांच माह की अवधि ऐसी थी, जिसमें पीड़ितों से मिला तो जाता था, लेकिन जन सुनवाई करने के लिए राज्य और केंद्र शासन की तरफ से प्रतिबंध था।
इस तरह आयोग को अपने एक साल के कार्यकाल में महज साढ़े छह माह की अधिकारिक कार्य करने का अवसर मिला। लॉकडाउन के दौरान पीड़ित महिलाओं के लिए टेलीफोनिक माध्यम से उनके मामलों में राहत पहुंचाई गई और अखबारों, समाचारों के माध्यम से स्वत: संज्ञान लेकर भी कई मामलों में कार्यवाही किया गया।
26 जिलों में कुल 62 जन सुनवाईया
अध्यक्ष ने कुल साढ़े छह माह में, 26 जिलों में, कुल 62 जन सुनवाईयां किया गया, जिसमें एक हजार 401 प्रकरणों की सुनवाई की जा चुकी है। इनमें से कुल 410 प्रकरणों (34.4 फीसद) को अंतिम सुनवाई कर पूर्णतः निराकृत कर नस्तीबद्ध किया जा चुका है। कई मामलों में उभय पक्षों के बीच समझौता करवाकर आयोग द्वारा उनके सुखी गृहस्थ जीवन की पुनः शुरुआत का प्रयास किया गया। कई प्रकरणों में आयोग की ओर से दोनों पक्षों की निगरानी भी किया जा रहा है। ज्ञात हो कि आयोग में अध्यक्ष डॉ. नायक के कार्यभार ग्रहण करने के समय 582 मामले पूर्व से लंबित थे।
महिला आयोग द्वारा लिए गए प्रमुख निर्णय
इस एक साल के कार्यकाल में आयोग द्वारा कुछ प्रमुख निर्णय लिए जिसमें बस्तर की 71 बेटियों को एनएमडीसी ने नौकरी नहीं दिया था, आयोग की सुनवाई के बाद 61 बेटियों को नौकरी मिलना सुनिश्चित हुआ। कोरिया के अपर कलेक्टर के खिलाफ निर्णय लिए गए। अंबिकापुर में सखी सेंटर की प्रशासिका को हटाया गया। भरण-पोषण के कई मामलों में तीन हजार, सात हजार, दस हजार, चौबीस हजार, पचास हजार और एक लाख रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण के निर्णय लिए गए। जगदलपुर में एक ही दिन में 98 मामलों की सुनवाई करने का रिकॉर्ड भी बना।

Related Articles

Back to top button