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पंजशीर पर कब्जे की खबरें गलत!अमरुल्ला सालेह बोले- मैं अपनी मिट्टी की रक्षा के लिए खडा हूं

अफगानिस्तान में नई सरकार की घोषणा से ठीक एक दिन पहले तालिबान ने  पंजशीर घाटी पर कब्जा  करने का दावा किया है। तालिबान का कहना है कि काबुल के उत्तर में पंजशीर घाटी पर कब्जा करने के बाद अफगानिस्तान में तालिबान विरोधियों का आखिरी किला भी ढह गया है। हालांकि तालिबान का डटकर सामना कर रहे अहमद मसूद और अफगानिस्तान के पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने इन सभी दावों को खारिज कर दिया है।

अहमद मसूद ने तालिबान के दावाें को किया खारिज 
अहमद मसूद ने तालिबान के दावाें को नकारते हुए ट्वीट  कि पंजशीर पर जीत की खबरें पाकिस्तानी मीडिया में घूम रही हैं। यह एक झूठ है। पंजशीर पर उनकी जीत पंजशीर में मेरा आखिरी दिन होगा, इंशाअल्लाह।’ उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने भी एक वीडियो जारी कर कहा कि सोशल मीडिया में उनके घायल होने और पंजशीर से भागने की अफवाह फैलाई जा रही है। हालांकि, मैं अब भी पंजशीर में अपने लोगों के साथ हूं और लगातार बैठकें कर रहा हूं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम एक मुश्किल स्थिति में हैं। हम तालिबान द्वारा आक्रमण को झेल रहे हैं।

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15 अगस्त से पंजशीर घाटी की सीमाओं पर लड़ाई जारी 
दरअसल 15 अगस्त को काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद से अब तक पंजशीर घाटी की सीमाओं पर हुई झड़पों में तालिबान के दर्जनों लड़ाके मारे जा चुके हैं और अब भी लड़ाई जारी है। रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान पंजशीर घाटी की सप्लाई लाइनों को काटने की कोशिश में हैं, ताकि एनआरएफ़ के लड़ाके अपना प्रतिरोध छोड़ने को मज़बूर हो जाएं।

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तालिबान ने ये किया दावा 
पंजशीर से जुड़े एक ट्विटर अकाउंट में कहा गया कि पाकिस्तानी, रूस और चीन पंजशीर रेजिस्टेंस के खिलाफ प्रोपेगेंडा चला रहे हैं। बता दें कि    तालिबान के एक सूत्र ने कहा कि सर्वशक्तिमान अल्लाह की कृपा से, हम पूरे अफगानिस्तान के नियंत्रण में हैं। संकट पैदा करने वालों को हरा दिया गया है और पंजशीर अब हमारे कब्जे में है। इससे पहले भी तालिबान ने दावा किया था कि उसके लड़ाकों ने पंजशीर के काफी बड़े हिस्से पर अपना कब्जा कर लिया है। तब पंजशीर के लड़ाकों ने इस दावे को खारिज कर दिया था।

कैसा है पंजशीर?
पंजशीर, अफ़ग़ानिस्तान के सबसे छोटे प्रांतों में से एक है। यहां 1.5 से 2 लाख लोग रहते हैं.। इस घाटी के बीचों बीच पंजशीर नदी बहती है और यह चारों ओर से 9,800 फ़ीट ऊंचे पवतों की चोटियों से घिरा है। यहां रहने वाले कई समूहों में सबसे बड़ा समूह ताजिक मूल के लोगों का है।  बाहरी लोगों से बहादुरी से लड़ने में घाटी के लोगों ने ख़ूब प्रतिष्ठा हासिल की है।

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