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अनुकरणीय पहल है स्पोर्ट्स बस चलाने की योजना

रायपुर। बिलासपुर जिला प्रशासन ने स्पोर्ट्स बस चलाने की योजना बनाई है। शुरुआती तौर पर कार्ययोजना के अनुसार यह बस प्रतिदिन अभ्यास करने आने वाले नवोदित खिलाड़ियों को उनके घर के आसपास से शहर के खेल मैदानों तक पहुंचाएगी। खेल मैदान में दो घंटे अभ्यास करने के बाद खिलाड़ी उसी बस से अपने-अपने घर लौट सकेंगे। सुबह छह बजे रेलवे स्टेशन से शुरू होने वाली यह बस आधे घंटे के भीतर खिलाड़ियों को उनकी पसंद के मैदान तक छोड़ देगी। शाम को भी खिलाड़ियों को यही सुविधा उपलब्ध होगी।
जिला प्रशासन की यह पहल प्रतिभाओं को खेल मैदानों तक पहुंचाने में काफी कारगर साबित हो सकती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए तो यह संजीवनी जैसी व्यवस्था होगी। इसके अलावा उन अभिभावकों के लिए भी लाभकारी होगी, जो अपने बच्चों को खिलाड़ी तो बनाना चाहते हैं, परंतु नौकरी और पेशे के दबाव में उन्हें नियमित रूप से खेल मैदान तक नहीं पहुंचा पाते हैं।
समयाभाव के कारण वे बच्चों को समय नहीं दे पाते हैं। इससे उनके बच्चों की खेल-प्रतिभा को निखरने का मौका नहीं मिल पाता। बच्चे खिलाड़ी बनने से वंचित रह जाते हैं। अब घर के पास बस स्टाप तक परिवार की महिलाएं भी बच्चों को पहुंचा सकेंगी। इससे भावी खिलाड़ियों के माता-पिता पर पड़ने वाला बहुपक्षीय दबाव भी कम होगा। वास्तविकता तो यही है कि संसाधन की कमी और समय प्रबंधन की चुनौतियों के कारण काफी खेल प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पातीं। जिला प्रशासन की तरफ से प्रतिभाओं को खेल मैदान तक पहुंचाने की यह व्यवस्था दूसरे जिलों के लिए भी अनुकरणीय हो सकती है।

खेल मैदान में सफलता के लिए नियमितता और कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं हो सकता। नियमित अभ्यास के बिना अच्छे से अच्छा कोच भी किसी खिलाड़ी को सफल नहीं बना सकता। बस मेें एक साथ महिला और पुरुष परिचालक की व्यवस्था अभिभावकों को यह सुनिश्चित कराने में कामयाब रहेगी कि प्रशासन की तरफ से उनके बच्चों को खेल मैदान ले जाने और वहां से लाने के लिए पुख्ता प्रबंधन किया गया है। इन बसों की सुविधा हासिल करने के लिए खिलाड़ियों को प्रशासन द्वारा पास भी जारी किया जाएगा।

न्यूनतम किराए की व्यवस्था भी जिम्मेदारीपूर्वक सुविधा का लाभ उठाने के लिए जरूरी है। अब यह भी जरूरी होगा कि खेल विभाग की तरफ से कोच और अन्य सुविधाओं का पर्याप्त प्रबंध हो, ताकि प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभारा जा सके। अतीत पर नजर डालें तो 1960 की रोम ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली हाकी टीम में बिलासपुर के खिलाड़ी लेसली क्लाडियस ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम एक बार फिर चमकाने के लिए प्रशासन के साथ-साथ औद्योगिक संगठनों और संस्थाओं को भी आगे आना चाहिए।

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