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पीएम मोदी बोले- भारत में लोकतंत्र है और आगे भी रहेगा, लोकतंत्र की भावना हमारी सभ्यता का अभिन्न अंग

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीडियो कांन्फ्रेंसिग के जरिए समिट फार डेमोक्रेसी को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे इस शिखर सम्मेलन में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत का प्रतिनिधित्व करने पर गर्व है। लोकतंत्र की भावना हमारी सभ्यता का अभिन्न अंग है। सदियों का प्रवासीय शासन भी भारतीय लोगों की लोकतांत्रिक भावना को नहीं दबा सका था। भारत की कहानी दुनिया के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि लोकतंत्र लागू किया जा सकता है। भारत में लोकतंत्र है और लोकतंत्र आगे भी जारी रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सदियों का औपनिवेशिक शासन भारतीय लोगों की लोकतांत्रिक भावना को दबा नहीं सका। इसने भारत की स्वतंत्रता के साथ फिर से पूर्ण अभिव्यक्ति पाई और पिछले 75 वर्षों में लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण में एक अद्वितीय कहानी रखी। बहुदलीय चुनाव, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया जैसी संरचनात्मक विशेषताएं लोकतंत्र के महत्वपूर्ण उपकरण हैं। हालांकि लोकतंत्र की मूल ताकत वह भावना और लोकाचार है जो हमारे नागरिकों और समाज में निहित है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों ने लोकतांत्रिक विकास के विभिन्न रास्तों का अनुसरण किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम एक दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं। हम सभी को अपनी लोकतांत्रिक प्रथाओं और प्रणालियों में लगातार सुधार करने की आवश्यकता है। आज की सभा दुनिया के लोकतंत्रों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक सामयिक मंच प्रदान करती है। इसमें भारत को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने और नवोन्मेषी, डिजिटल समाधानों के माध्यम से शासन के सभी क्षेत्रों में पारदर्शिता बढ़ाने में अपनी विशेषज्ञता साझा करने में खुशी होगी।

पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र हमारे नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है और मानवता की लोकतांत्रिक भावना का जश्न मना सकता है। भारत इन नेक प्रयासों में साथी लोकतंत्रों के साथ शामिल होने के लिए तैयार है। इससे पहले पीएम मोदी ने गुरुवार को इस सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए तकनीकी कंपनियों से सहयोग की अपेक्षा जताई।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत की सभ्यता का मूल तत्व लोकतंत्र का उद्भव है। भारतीयों में लोकतंत्र की भावना, कानून का आदर करना और बहुलवादी प्रकृति को स्वीकार करने की भावना भरी होती है। सभी लोकतांत्रिक देशों को अपने संविधान में दिए गए लोकतांत्रिक मूल्यों के मुताबिक कदम उठाने की जरूरत है। संवेदनशीलता, उत्तरदायित्व, हिस्सेदारी और सुधार लोकतांत्रिक शासन के ये चार हिस्से हैं।

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