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बंटवारे के अनसुलझे सवालों का नतीजा पहलगाम… मणिशंकर अय्यर के बयान ने मचाई खलबली

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से ही पूरा देश गुस्से की आग में जल रहा है. हर कोई पाकिस्तान से बदला लेने की बात कर रहा है. तमाम विपक्षी दल सरकार के साथ खड़े होकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. इस बीच कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने पहलगाम हमले को लेकर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने पूछा है कि क्या पहलगाम की आतंकी घटना के पीछे देश विभाजन के अनसुलझे सवालों का प्रतिबिंब दिखाई देता है?

अय्यर ने कहा कि 1947 में भारत का बंटवारा मूल्यों और राष्ट्रवाद की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण हुआ था और आज भी हम उसी के नतीजों को भुगत रहे हैं. अय्यर ने कहा कि क्या पहलगाम की त्रासदी उसी बंटवारे के अधूरे सवालों की छाया नहीं है? जब पूरा देश आतंक के खिलाफ एकजुटता दिखा रहा है, तब बंटवारे की बातें करना क्या जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा नहीं है? इसके साथ ही उन्होंने कहा कि क्या 22 अप्रैल को पहलगाम के पास हुई भयावह त्रासदी में विभाजन के अधूरे सवालों की झलक नहीं मिलती?

अय्यर ने कहा कि उस समय कई लोगों ने विभाजन को रोकने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन गहरे मतभेदों के चलते यह कभी नहीं टल सका. विभाजन हुआ और आज तक हम उसके नतीजों को भुगत रहे हैं. उन्होंने कहा कि क्या हमें इसे यूं ही स्वीकार कर लेना चाहिए?

मुस्लिमों को तोड़फोड़ करने वाले खतरे के रूप में देख रहे- अय्यर

मणिशंकर अय्यर ने कहा कि उस समय भारत के सामने यही सवाल था कि लगभग 10 करोड़ मुसलमानों के साथ क्या किया जाए. यही वास्तविक प्रश्न आज भी उसे परेशान कर रहा है कि अब लगभग 20 करोड़ मुसलमानों के साथ क्या किया जाए? उन्होंने कहा, हमें सोचना होगा कि क्या हम जिन्ना के नजरिए को स्वीकार करते हैं और कहते हैं कि मुसलमानों के लिए अलग देश बन चुका है? क्या हम मुस्लिमों को हमारे बीच तोड़फोड़ करने वाले या संभावित खतरे के रूप में देख रहे हैं.

मुसलमान क्या महसूस करता है?

कांग्रेस नेता ने कहा कि 1971 का विभाजन हुआ, जब पाकिस्तान की आधी से अधिक आबादी और उसके क्षेत्र का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा जानबूझकर इस आधार पर उससे दूर चला गया कि मुसलमान होना ही काफी नहीं है और बंगाली होना भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि यह समझने में फेल कि हर मुक्ति के इस पहचान के एक से अधिक आयाम होते हैं.

उन्होंने पूछा कि क्या वर्तमान भारत में क्या मुसलमान यह महसूस करता है कि उसे स्वीकार किया जा रहा है? क्या उसे एहसास हो रहा है कि उसका ध्यान रखा जा रहा है? क्या मुसलमान यह महसूस करता है कि उसे भी सम्मान दिया जा रहा है? बकौल अय्यर, हमें इन सवालों का जवाब तलाशना होगा. किसी भी मुसलमान से पूछिए और आपको जवाब मिल जाएगा.

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