Madhya Pradesh High Court: मुरैना में अवैध रूप से चल रही ब्लैक ऑइल इकाइयों पर घिरा प्रशासन, मांगा गया जवाब

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ जडेरुआ औद्योगिक क्षेत्र से उठने वाला जहरीला धुआं अब सीधे उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) तक पहुँच गया है। आरोप है कि इस इंडस्ट्रियल एरिया में विदेशों से मंगाए जाने वाले पुराने टायरों को जलाकर ब्लैक ऑइल (काला तेल) निकालने वाली अवैध इकाइयाँ धड़ल्ले से जहरीला धुआँ और केमिकल युक्त पानी छोड़ रही हैं। इसके कारण आसपास के दर्जनों गाँवों का जनजीवन, भूजल और पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कैंसर, चर्म रोग, अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों के साथ-साथ मवेशियों और मछलियों की मौत के गंभीर मामलों को देखते हुए आखिरकार हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है और जिम्मेदार अधिकारियों व फैक्ट्री संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
⚖️ जनहित याचिका पर जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बेंच का आदेश: फर्जी प्रमाण-पत्र और जलस्रोतों को प्रदूषित करने का आरोप
भाजपा नेता एवं याचिकाकर्ता योगेंद्र मावई द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बेंच ने प्रशासन और फैक्ट्री संचालकों को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बानमोर और नूराबाद के रेड जोन वाले इन औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित फैक्ट्रियों के कारण खतरनाक प्रदूषण फैल रहा है। एक फैक्ट्री पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कथित फर्जी प्रमाण-पत्र पेश करने का भी गंभीर आरोप है। स्थानीय लोगों और कांग्रेस के प्रदेश सचिव जसवीर गुर्जर ने आरोप लगाया कि विरोध के बाद अब केमिकल युक्त दूषित पानी को टैंकरों के माध्यम से जंगलों और सड़कों के किनारे फेंका जा रहा है, जिससे पानी पीकर मवेशी और पक्षी अपनी जान गंवा रहे हैं।
🔍 प्रशासन की कार्रवाई और अपर कलेक्टर का बयान: नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
लगातार शिकायतों और धरना-प्रदर्शनों के बावजूद स्थानीय स्तर पर ठोस कार्रवाई न होने के कारण ग्रामीणों को अदालत की शरण लेनी पड़ी। इस पूरे मामले पर मुरैना के अपर कलेक्टर अश्वनी कुमार रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि जडेरुआ क्षेत्र में टायर जलाकर तेल निकालने वाली फैक्ट्रियों की पहले भी दो बार जाँच की जा चुकी है, जिसके तहत नियमों का उल्लंघन मिलने पर चार फैक्ट्रियों को सील भी किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय से प्राप्त निर्देशों का पूरी तरह से पालन कराया जाएगा। यदि जाँच में कोई भी फैक्ट्री पर्यावरणीय नियमों या अनुमति की शर्तों का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।