आरा में रिटायर्ड कस्टम अधिकारी हत्याकांड का मुख्य शूटर मुठभेड़ में घायल, पुलिस ने पैर में मारी गोली

आरा: बिहार के भोजपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ जिले के चर्चित पूर्व कस्टम अधिकारी (रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर) रामकुमार सिंह हत्याकांड की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने मुख्य शूटर को धर दबोचा है। शुक्रवार की तड़के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के धोबहा के पास पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान मुख्य शूटर पवन यादव पुलिस की गोली लगने से घायल हो गया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश के दाहिने पैर में घुटने के नीचे गोली लगी है, जिसके बाद घायल शूटर को पुलिस अभिरक्षा में इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। इस सनसनीखेज मुठभेड़ की सूचना मिलते ही भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) अवधेश दीक्षित और एसडीपीओ (SDPO) सुशील कुमार तुरंत मौके पर पहुँचे और पूरे मामले की गहन छानबीन शुरू कर दी।
हथियार बरामदगी के दौरान पुलिस पर फायरिंग कर भागने की कोशिश कर रहा था मुख्य शूटर, जवाबी कार्रवाई में दबोचा गया बदमाश
पुलिस गिरफ्त में आए घायल शूटर की पहचान शहर के नवादा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चंदवा हाउसिंग कॉलोनी निवासी निर्मल यादव के 22 वर्षीय पुत्र पवन यादव के रूप में हुई है। जांच में यह बात सामने आई है कि वही वह शख्स है जिसने रिटायर्ड अधिकारी रामकुमार सिंह पर सबसे पहली गोली चलाई थी। एसपी अवधेश दीक्षित और एसडीपीओ सुशील कुमार ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि रिमांड पर पूछताछ के दौरान पवन यादव ने हत्याकांड में इस्तेमाल किए गए मुख्य हथियार को छिपाने की जगह पुलिस को बताई थी। जब पुलिस टीम उसे लेकर हथियार बरामद करने के लिए मौके पर पहुँची, तो उसने चालाकी दिखाते हुए छिपाई गई पिस्तौल से अचानक पुलिस दल पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस द्वारा बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद जब उसने गोलीबारी बंद नहीं की, तो आत्मरक्षा में पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी, जिसमें गोली उसके पैर में लगी और उसे दबोच लिया गया।
बीती 15 अक्टूबर को टहलने के दौरान मारी गई थी गोली, 7 लाख रुपये की सुपारी देकर रची गई थी पूर्व अधिकारी की हत्या की साजिश
गौरतलब है कि गत 15 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 6 बजे आरा के नवादा थाना क्षेत्र स्थित कनकपुरी मोहल्ले में (जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के पास) जब रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर रामकुमार सिंह रोज की तरह टहलने निकले थे, तभी घात लगाए बदमाशों ने उनकी गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी। पुलिस की अब तक की तकनीकी और मानवीय जांच में यह खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपियों (चंदन सिंह व अन्य) ने रामकुमार सिंह को रास्ते से हटाने के लिए करीब 7 लाख रुपये की भारी-भरकम सुपारी तय की थी। इस खौफनाक साजिश को अंजाम देने के लिए हथियार और पिस्तौल खरीदने हेतु पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपये एडवांस के तौर पर दिए गए थे। इस बहुचर्चित मामले में पुलिस पहले ही कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, जिसमें शूटर पिंटू कुमार (जिसे कोईलवर से पकड़ा गया था, जो 10 संगीन मामलों का वादी है), मुख्य अभियुक्त मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की, चंदन सिंह और अभिषेक कुमार (दोनों को कोलकाता एयरपोर्ट से दबोचा गया था) तथा टीपू (चंदवा हाउसिंग निवासी) शामिल हैं।
14 कट्ठा जमीन का पुराना विवाद बना हत्या की मुख्य वजह, पुलिस अब म्यूटेशन और पावर ऑफ अटॉर्नी के खेल की कर रही है जांच
भोजपुर के पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि इस पूरी हत्या के पीछे सिंगही इलाके में स्थित 14 कट्ठा भूमि का पुराना विवाद मुख्य वजह बना है (यह जमीन थाना नंबर 245, खेसरा 69 और खाता संख्या 88 के अंतर्गत आती है)। मृतक रामकुमार सिंह के बेटे के नाम पर यह जमीन वर्ष 2006 से दर्ज थी और उन्होंने वर्ष 2020 में इस पर पक्की बाउंड्री भी करवाई थी। इसके बावजूद विपक्षी गुट ने वर्ष 2025 में इस जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल कर ली और इसे अवैध रूप से अलग-अलग लोगों के नाम पर रजिस्ट्री कराकर म्यूटेशन भी करवा लिया था। पुलिस अब इस बात की भी बहुत गहराई से छानबीन कर रही है कि जब रामकुमार सिंह का इस संपत्ति पर लंबे समय से वैध कब्जा था, तो बिना उनकी जानकारी के इसका म्यूटेशन कैसे संभव हुआ। एसपी ने अंत में बताया कि गिरफ्तार शूटर पवन यादव से पूछताछ के दौरान मिले अन्य सुरागों के आधार पर वारदात में शामिल बाकी बाइक सवार शूटरों की गिरफ्तारी के लिए भी विभिन्न संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।





