ब्रेकिंग
Namo Bharat News: दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पर नमो भारत की 10 अतिरिक्त ट्रिप्स; अब और भी आसान होगा सफर Border Security News: घुसपैठ और तस्करी पर नकेल; अमित शाह ने जिला अधिकारियों को सौंपी अहम जिम्मेदारी,... Modi Govt 12 Years: मोदी सरकार के केंद्र में 12 साल पूरे; भाजपा मनाएगी भव्य जश्न, 2047 का रोडमैप होग... Ayushman Bharat Delhi: दिल्ली में 7.72 लाख से ज्यादा आयुष्मान कार्ड जारी; 10 लाख तक का मिल रहा कैशले... Annapurna Bhandar Update: लक्ष्मी भंडार में गड़बड़ियों का दावा; बंगाल सरकार ने शुरू की नई स्कीम, जून स... TMC Leaders in Legal Trouble: ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें; भड़काऊ टिप्पणी को लेकर ... Action Against Bhojpuri Singer: सम्राट चौधरी पर गाली-गलौज और अभद्र भाषा; पटना साइबर पुलिस ने गायक चु... CAT Stay on DGHS Chief Transfer: दिल्ली DGHS प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल के तबादले पर CAT की रोक; सरका... Supreme Court Verdict: एसआईआर की संवैधानिक वैधता पर कोर्ट का फैसला; अभिषेक मनु सिंघवी बोले- 'चुनाव आ... Lucknow Gangrape Case: यूपीएससी छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म मामले में फरार आरोपितों पर 25-25 हजार का ...
देश

अदालतों में मौत की सजा देने की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट बनाएगा गाइडलाइंस 

नई दिल्ली । किसे फांसी हो और किसे न हो इसके लिए देशभर की अदालतों में मौत की सजा देने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को लेकर देश का सर्वोच्च न्यायालय जल्द ही गाइडलाइंस बनाएगा। जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एस रविंद्र भट्ट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस दिशा में कार्यवाही शुरू कर दी है। अदालत ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से इस मामले में सहायता करने के लिए कहा है। नेशनल लीगल सर्विसेज से भी जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 10 मई को होगी।  समाचार के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के इरफान उर्फ भैय्यू मेवाती की एक याचिका पर विचार करते हुए ये निर्णय लिया।  इरफान को नाबालिग से रेप के आरोप में निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिस पर हाईकोर्ट की भी मुहर लग चुकी है।  इरफान ने इस आदेश के खिलाफ अपील कर रखी है। उसी पर सुनवाई के दौरान इरफान के वकील ने एक अर्जी दाखिल करके मिटिगेशन इनवेस्टिगेटर को जेल में उससे मुलाकात करने और उसके बचाव में सूचनाएं जुटाने की इजाजत देने का निर्देश देने की गुहार लगाई है।
इरफान के वकील का इरशाद हनीफ का कहना है कि मध्य प्रदेश के जेल नियमों में इस तरह के प्रतिबंधों के कारण उन्हें सुप्रीम कोर्ट मे ये अर्जी दाखिल करनी पड़ी है। एमपी के जेल मैनुअल के मुताबिक, फांसी की सजा पाए कैदी से सिर्फ लीगल एडवाइजर ही इंटरव्यू कर सकता है। राज्य में लीगल एडवाइजर की जो परिभाषा दी गई है, उसमें मिटिगेशन इनवेस्टिगेटर फिट नहीं होते। मिटिगेशन इनवेस्टिगेटर डिफेंस टीम का हिस्सा होते हैं, जो आरोपी से मुलाकात करके उसके बचाव में काम आने वाली सूचनाएं जुटाते हैं। इरफान के वकील ने बताया कि उन्होंने उज्जैन के सेंट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट के यहां मिटिगेशन की अर्जी दाखिल की थी, जिसका कोई फायदा नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी पर सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी के.  परमेश्वर ने मध्य प्रदेश में लागू उस नीति की तरफ ध्यान दिलाया, जिसमें सरकारी वकील को इस आधार पर प्रमोशन दिए जाने का प्रावधान है कि उसने कितने मामलों में आरोपियों को फांसी दिलवाई।  इस पर बेंच ने इस पॉलिसी को भी रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने सर्वोच्च न्यायालय ने अदालतों में फांसी की सजा देने के लिए अपनाई जाने वाली न्यायिक प्रक्रिया में सुधार के लिए खुद संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी।  कोर्ट ने गौर किया था कि सजा ए मौत देने से पहने अपनाई जाने वाली प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष कैसे हो सकती है। अदालतें किस तरह अपराध की प्रकृति और आरोपी का व्यापक विश्लेषण तैयार करें, जिससे उन्हें ये निर्णय लेने में आसानी हो कि किसी को फांसी दी जानी चाहिए या नहीं।

Related Articles

Back to top button