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कश्मीर मामले में फिर कूदा US, कहा-अलगाववादी नेताओं को जल्द रिहा करे भारत

वॉशिंगटन: अमेरिका ने वीरवार को भारत से कश्मीर में राजनीतिक और आर्थिक स्थिति सामान्य करने का ‘‘खाका” पेश करने और जल्द से जल्द राजनीतिक बंदियों को रिहा करने की इच्छा जताई है। अमेरिका ने साथ ही पाकिस्तान को भी उसके क्षेत्र में आतंकवादियों के खिलाफ निरंतर और स्थिर कदम उठाने को कहा है। भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान खत्म करने के फैसले के मद्देनजर राज्य के कई अलगाववादी नेताओं को हिरासत में लिया था और उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे पूर्व मुख्यमंत्री सहित कई मुख्यधारा के नेता नजरबंद हैं।

‘दक्षिण एवं मध्य एशिया’ मामलों की कार्यवाहक सहायक विदेश मंत्री एलिस जी वेल्स ने कहा कि हम रोजमर्रा की सेवाओं के पूरी तरह बहाल होने तक लगातार दबाव बनाना जारी रखेंगे, लेकिन सबसे अधिक जरूरी राजनीतिक और आर्थिक स्थिति सामान्य करने के लिए खाका तैयार करना है। विदेश मंत्रालय के ‘फॉगी बॉटम मुख्यालय’ में वेल्स ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका घाटी की स्थिति को लेकर बेहद चिंतित  हैं, जहां करीब 80 लाख स्थानीय लोगों का जीवन जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने और राजनीतिज्ञों को बिना कारण हिरासत में लेने और संचार प्रतिबंधों के कारण प्रभावित है। उन्होंने कहा कि हमने थोड़ी प्रगति देखी है, जैसे कि करीब 40 लाख मोबाइल फोन पर पोस्टपेड सेवाएं बहाल हुई हैं, लेकिन एसएमएस और इंटरनेट सेवाओं पर अब भी प्रतिबंध है।

वेल्स ने कश्मीर की स्थिति पर नजर बनाएं रखने के लिए मीडिया की सराहना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है लेकिन सुरक्षा प्रतिबंधों के चलते पत्रकारों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लश्कर-ए-तैबार, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे गिरोह निश्चित तौर पर परेशानी का कारण हैं। इस सिलसिले में हम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सितंबर में आए उस बेबाक बयान का स्वागत करते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर में हिंसा करने के लिए पाकिस्तान से गुजरने वाला हर शख्स पाकिस्तानियों और कश्मीरियों, दोनों का दुश्मन होगा।

वेल्स ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हम रचनात्मक बातचीत देखना चाहेंगे, जो कि पाकिस्तान के उसके क्षेत्र में आतंकवादियों के खिलाफ निरंतर और स्थिर कदमों पर आधारित होनी चाहिए। इस बीच, विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक बार फिर कहा कि अगर दोनों देश चाहें तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मामले पर मध्यस्थता करने को तैयार हैं। वरिष्ठ अधिकारी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि ट्रम्प निश्चित तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार हैं, अगर दोनों देशों ने इसकी मांग की तो। बाहरी मदद लेना भारत का निर्णय होगा।

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