ब्रेकिंग
मणिपुर के जंगलों में लगी भीषण आग; वायुसेना के Mi-17V5 हेलिकॉप्टरों ने मोर्चा संभाला, आसमान से बरसाया... "उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो"; राहुल गांधी ने किया समर्थन, बीजेपी और संघ पर साधा तीखा निशाना शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मिले अलंकार अग्निहोत्री; दिल्ली कूच की दी बड़ी चेतावनी, जानें क्या ह... Bihar News: औरंगाबाद में पांच सहेलियों ने उठाया खौफनाक कदम; 4 की जान गई, एक की हालत गंभीर, आत्महत्या... Delhi-UP Weather Update: दिल्ली-यूपी में बारिश और पहाड़ों पर बर्फबारी का अलर्ट, IMD ने अगले 3 दिनों ... Jalandhar Crime: जालंधर में दिन-दिहाड़े ज्वैलर पर खूनी हमला, दुकान में घुसकर बदमाशों ने मचाया तांडव;... Punjab Road Accident: पंजाब में भीषण सड़क हादसा, पेड़ से टकराकर कार के उड़े परखच्चे; चालक की मौके पर... नशे का 'ग्लोबल नेटवर्क' ध्वस्त! विदेशों में होनी थी अफीम की सप्लाई, पुलिस ने ऐसे बेनकाब किया अंतरराष... PM मोदी ने डेरा सचखंड बल्लां में टेका मत्था; संत निरंजन दास जी से लिया आशीर्वाद, रविदास जयंती पर बड़... PM मोदी की यात्रा रविदासिया समाज के प्रति सम्मान और विश्वास का संदेश: सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल
धार्मिक

दाईं और बाईं सूंड वाले गणपति, घर और मंदिर में क्यों रखी जाती हैं अलग-अलग तरह की प्रतिमाएं?

भगवान गणेश, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है, हर शुभ कार्य के आरंभ में पूजे जाते हैं. उनकी प्रतिमाओं में उनकी सूंड की दिशा हमेशा एक चर्चा का विषय रही है. क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ मूर्तियों में उनकी सूंड बाईं ओर और कुछ में दाईं ओर क्यों होती है? यह सिर्फ़ एक डिज़ाइन का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व छिपा है.

गणेश जी को वक्रतुण्ड कहा गया है, यानी कहीं उनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी मिलती है, तो कहीं दाईं ओर.दोनों ही स्वरूपों का अलग-अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है. आइए जानते हैं कि घर और मंदिर में रखी जाने वाली गणेश प्रतिमाओं में सूंड की दिशा अलग-अलग क्यों होती है.

बाईं ओर सूंड वाले गणपति

घर में पूजन के लिए श्रेष्ठ

परंपरा के अनुसार, घरों में बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा रखना शुभ माना जाता है. इसका कारण यह है कि शरीर का बायां हिस्सा हृदय और भावनाओं से जुड़ा होता है. यह जीवन की भौतिक और भावनात्मक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व करता है.

सुख-शांति और सौम्यता का प्रतीक

बाईं सूंड वाले गणपति को शांत और सौम्य स्वरूप वाला माना जाता है. घर में इस प्रतिमा की पूजा करने से परिवार में शांति, प्रेम और आपसी सामंजस्य बना रहता है.

वेदिक परंपरा का प्रभाव

यह मान्यता वैदिक परंपरा से जुड़ी है, जहां गणपति का यह स्वरूप घर-परिवार में समृद्धि और स्थिरता का कारक माना गया है.

दाईं ओर सूंड वाले गणपति

मंदिरों और तांत्रिक परंपरा में पूजनीय

दाईं ओर सूंड वाले गणपति की मूर्ति आमतौर पर मंदिरों में स्थापित की जाती है. शरीर का दायां हिस्सा आध्यात्मिकता और ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है. इसलिए तांत्रिक परंपराओं में इस स्वरूप का विशेष महत्व है.

सक्रियता और शक्ति का प्रतीक

इस स्वरूप को अत्यधिक शक्तिशाली और जाग्रत माना गया है. मान्यता है कि जो व्यक्ति धन-धान्य, ऐश्वर्य और शक्ति की कामना करता है, उसे दाईं सूंड वाले गणपति की पूजा करनी चाहिए.

सावधानी की आवश्यकता

शास्त्रों में बताया गया है कि इस स्वरूप की पूजा विधि-विधान से ही करनी चाहिए. यही कारण है कि इसे सामान्य घरों की बजाय मंदिरों और विशेष साधनाओं में स्थापित किया जाता है.

सूंड की दिशा का आध्यात्मिक संदेश

गणेश जी की सूंड हमेशा हिलती-डुलती रहती है, जो उनके हर पल सक्रिय रहने का संकेत देती है. यह हमें सिखाती है कि जीवन में भी हमें सदैव कर्मशील और जाग्रत रहना चाहिए.

बाईं सूंड: शांति, प्रेम, सौम्यता और पारिवारिक सुख का प्रतीक.

दाईं सूंड: शक्ति, आध्यात्मिकता, ऐश्वर्य और विजय का प्रतीक.

Related Articles

Back to top button