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JTET 2026: झारखंड के शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी! 31 मार्च तक तैयार होगी नई नियमावली; परीक्षा पैटर्न और नियमों में होंगे ये बड़े बदलाव

रांचीः झारखंड में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है. झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) की नई नियमावली को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और इसे 31 मार्च तक फाइनल किए जाने की तैयारी चल रही है. राज्य का स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है ताकि लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को जल्द स्पष्ट दिशा मिल सके.

जानकारी के अनुसार, जेटेट परीक्षा के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है. झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) ने संशोधित सिलेबस तैयार कर शिक्षा विभाग को सौंप दिया है. अब विभाग की ओर से नियमावली को अंतिम रूप देने के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. नई नियमावली लागू होने के बाद आगामी जेटेट परीक्षा इसी आधार पर आयोजित की जाएगी.

अभ्यर्थियों ने जताई थी आपत्ति

दरअसल, वर्ष 2024 में जेटेट के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी लेकिन परीक्षा के सिलेबस और प्रश्नों के कठिनाई स्तर को लेकर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि झारखंड में निर्धारित सिलेबस और प्रश्नों का स्तर अन्य राज्यों या केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटेट) की तुलना में काफी अधिक कठिन है. इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने एक समिति का गठन किया था. जिसने स्थिति की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसी रिपोर्ट के आधार पर नियमावली में बदलाव का निर्णय लिया गया है.

जेटेट परीक्षा के प्रश्नों की कठिनाई के स्तर में बदलाव

नई व्यवस्था के तहत जेटेट परीक्षा के प्रश्नों की कठिनाई के स्तर में बदलाव किया जाएगा. पहले कक्षा 1 से 5 के लिए होने वाली परीक्षा में इंटरमीडिएट स्तर तक के प्रश्न पूछे जाते थे, जबकि कक्षा 6 से 8 के लिए स्नातक स्तर के प्रश्न शामिल होते थे. अब इस व्यवस्था को सरल बनाया जा रहा है. संशोधित नियमों के अनुसार कक्षा 1 से 5 के लिए परीक्षा के प्रश्नों का स्तर मैट्रिक या समकक्ष होगा, जबकि कक्षा 6 से 8 के लिए प्रश्नों का स्तर इंटरमीडिएट या प्लस टू के बराबर रखा जाएगा.

परिषद की ओर से संशोधित सिलेबस तैयार कर शिक्षा विभाग को सौंप दिया गया है. अब अंतिम निर्णय शिक्षा विभाग को लेना है, क्योंकि उसी के आधार पर आगे जेटेट परीक्षा का आयोजन किया जाएगा. -प्रदीप कुमार चौबे, डिप्टी डायरेक्टर, जेसीईआरटी.

परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव

परीक्षा प्रणाली में एक और बड़ा बदलाव पासिंग क्राइटेरिया को लेकर किया जा रहा है. वर्तमान नियमावली के तहत अभ्यर्थियों को कुल न्यूनतम अंक प्राप्त करने के साथ-साथ प्रत्येक विषय या खंड में भी अलग-अलग पास मार्क्स लाना अनिवार्य होता है. सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को प्रत्येक खंड में कम से कम 40 प्रतिशत और कुल मिलाकर 60 प्रतिशत अंक लाने होते हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के लिए प्रत्येक खंड में 35 प्रतिशत और कुल 55 प्रतिशत अंक आवश्यक होते हैं.

नई नियमावली में सरल प्रावधान

नई नियमावली में इस प्रावधान को सरल बनाया जा रहा है. प्रस्तावित बदलाव के अनुसार अब अभ्यर्थियों को हर विषय में अलग-अलग पास होना जरूरी नहीं होगा. परीक्षा में सफल होने के लिए केवल कुल मिलाकर निर्धारित न्यूनतम कट-ऑफ अंक प्राप्त करना ही पर्याप्त होगा. इसके तहत सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों को कुल 60 प्रतिशत तथा अन्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 55 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे.

नई नियमावली लागू होने के बाद उम्मीद है कि परीक्षा प्रक्रिया अधिक संतुलित और व्यावहारिक बनेगी तथा लंबे समय से बदलाव की मांग कर रहे अभ्यर्थियों को भी इससे राहत मिलेगी.

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