ब्रेकिंग
Gwalior News: ग्वालियर में लिफ्ट में फंसे मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, 10-15 म... Madhya Pradesh Local News: छिंदवाड़ा को सूखाग्रस्त घोषित करने और मुआवजे की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट प... MP Education Department Update: वर्ष 2001 से पहले नियुक्त शिक्षाकर्मियों को बड़ा फायदा, हाईकोर्ट ने ... Kanker Patwari Strike: कांकेर में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से धान खरीदी और फसल सर्वे का काम... सूर्य नगर में आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की नई सुविधा, ‘आयु आरोग्य’ के जरिए स्थानीय लोगों को मिल... Bilaspur Political News: बिलासपुर में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, कांग्रेस भवन में हंगामे को लेकर पुल... Kawardha Police Action: सरेआम धारदार हथियार लेकर घूम रहे थे बदमाश, सिटी कोतवाली पुलिस ने दबोचा Chhattisgarh News: कोरबा में पटवारी संघ ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, 13 अक्टूबर से उग्र आंदोलन का ऐला... Latehar News: चंदवा के ब्रजमोहन राम बने ओडिशा के राज्यपाल, झारखंड और पलामू में जश्न का माहौल SIR Voter List Jharkhand: 30 नवंबर तक होगा अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन, एक दस्तावेज देकर दर्ज कराएं...
देश

ऑपरेशन जैकबूट 2 में मारा गया आतंकी सरगना रियाज नाइकू, एनएसए अजित डोभाल ने की थी व्यूह रचना

श्रीनगर। कश्मीर घाटी में आतंक के पर्याय बने हिजबुल कमांडर रियाज नाइकू को मार गिराना ऑपरेशन जैकबूट की बड़ी सफलता है। स्वयं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने इस अभियान की व्यूह रचना की थी। सुरक्षा बल छह माह से इस अभियान पर जुटे थे। ऑपरेशन जैकबूट का दूसरा चरण पिछले साल अक्टूबर माह में शुरू किया गया था, जबकि इसका पहला चरण पुलवामा हमले के तुरंत बाद 18 फरवरी 2019 को आरंभ होकर जून में समाप्त कर दिया गया था। एनएसए डोभाल ऑपरेशन जैकबूट की गतिविधियों की साप्ताहिक समीक्षा करते हैं।

डोभाल ने इस अभियान में अपने उन मित्रों का सहारा लिया जिन्हें कश्मीर में उनके ‘आंख-कान’ कहा जाता है। बताया जा रहा है कि नाइकू को मार गिराने के अभियान के दौरान उन्होंने तीन बार पुलिस के शीर्ष अधिकारियों से बातचीत की है। उन्होंने ही जैकबूट-1 और जैकबूट-2 में शामिल अधिकारियों को खुद चिह्नित किया था। इसके साथ ही डीआइजी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में ऑनग्राउंड सर्विलांस व एक्शन टीम को गठित किया गया।

नवीद का पकड़ा जाना भी रहा अहम 

इस वर्ष 11 जनवरी को श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर डीएसपी देवेंद्र सिंह के साथ हिजबुल के मोस्टवांटेड आतंकी नवीद बाबू की गिरफ्तारी भी जैकबूट-2 का ही कमाल है। इसके अलावा पुलवामा का मुख्य साजिशकर्ता जैश कमांडर कारी यासिर त्राल में 25 जनवरी को अपने दो अन्य साथियों संग मारा गया।

कब शुरू हुआ जैकबूट 2 

सूत्रों ने बताया कि अगर रियाज नाइकू एंड कंपनी अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद दूसरे राज्य के श्रमिकों, ट्रक चालकों और सेब व्यापारियों को निशाना न बनाते तो जैकबूट 2 शुरू नहीं होता। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने दक्षिण कश्मीर में पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और अनंतनाग का दौरा कर वहां लोगों से खुद बातचीत की थी। जैकबूट-2 में दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को दो वर्गों में रखा गया। पहले वर्ग में पूरे दक्षिण कश्मीर में गतिविधियों चला रहे आतंकी थे जो सोशल मीडिया में भी सक्रिय थे। दूसरे वर्ग में वह शामिल थे जो कमांडरों के आदेश पर वारदात अंजाम दे रहे थे और अपने-अपने इलाके में पोस्टर ब्वाय बन रहे थे। इसके तहत ही त्राल मे हमादखान, बुरहान कोका, आसिफ और लतीफ दास जैसे आतंकियों का सफाया किया गया।

सूची में सबसे ऊपर था नाइकू 

जैकबूट-2 में नाइकू सबसे ऊपर था। ऐसे में पहले उसके ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क को नेस्तनाबूद करते हुए उसके 30 खबरियों को पकड़ा गया। इसके साथ ही उसके सभी प्रमुख ठिकानों को नष्ट किया गया। ठिकाने नष्ट होने के बाद वह अपने गांव में मां से मिलने गया और यहीं वह जाल में फंस गया।

मकान की छत पर बना रखा था ठिकाना

 उसने एक रिश्तेदार के मकान में टिन की छत के नीचे अपना ठिकाना बना रखा था। ऐसी जगह आमतौर पर कश्मीरी घर का बेकार सामान रखते हैं। यहां से मकान के आस-पास के घरों और गलियों में आसानी से निगाह रखी जा सकती थी। आइजीपी कश्मीर विजय कुमार ने कहा कि हम छह माह से रियाज नाइकू के पीछे पड़े हुए थे।

पुलवामा के बाद शुरू हुआ था जैकबूट-1 

पुलवामा हमले के बाद ऑपरेशन जैकबूट लाया गया। इसमें खास कमांडरों को टारगेट करने का लक्ष्य रखा गया। पहले चरण में करीब 104 आतंकियों को मार गिराया गया। इनमें जैश के गाजी इमरान समेत करीब छह शीर्ष कमांडरों के अलावा लश्कर और हिजबुल के एक दर्जन नामी कमांडर भी शामिल हैं। यह ऑपरेशन आलआउट को धार देने के लिए था और इसके पीछे भी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का ही दिमाग था। उनके ही निर्देश पर मई 2017 में कश्मीर में 12 मोस्टवांटेड आतंकियों की सूची को सार्वजनिक किया गया था। इसमें से सिर्फ नाइकू ही जिंदा बचा था।

मारे जा चुके हैं सभी बड़े कमांडर 

2014-16 के दौरान या इससे पहले सक्रिय सभी प्रमुख आतंकी कमांडर मारे जा चुके हैं या पाकिस्तान भाग चुके हैं। दो-चार ही इस समय वादी में सक्रिय हैं। आतंकियों की बढ़ती तादाद पर रोक के लिए आवश्यक था कि इसकी लीडरशिप पर प्रहार किया जाए। यह रणनीति कारगर रही। इसका सीधा असर कैडर के मनोबल पर भी दिखा।

Related Articles

Back to top button