Punjab Assembly Elections 2027: पंजाब में जल्द बज सकता है चुनाव का बिगुल, जनवरी के पहले हफ्ते में लग सकती है आचार संहिता

जालंधर: उत्तर भारत के प्रमुख राज्य पंजाब में वर्ष 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो चुकी हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि नए वर्ष यानी जनवरी 2027 के प्रथम सप्ताह तक राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू की जा सकती है। इसके साथ ही, विधानसभा चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया फरवरी माह के पहले अथवा दूसरे सप्ताह के दौरान संपन्न कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से अभी तक चुनावों के आधिकारिक शेड्यूल या कार्यक्रम का ऐलान नहीं किया गया है।
प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए चुनाव आयोग सख्त, तीन साल या गृह जिले में जमे अधिकारियों के तबादलों की तैयारी
जैसे ही राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता प्रभावी होगी, वैसे ही सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों तथा नई नियुक्तियों के संबंध में निर्वाचन आयोग के कड़े दिशा-निर्देश लागू हो जाएंगे। आगामी चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करने में प्रशासनिक मशीनरी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसी सिलसिले में चुनाव आयोग ने उन तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की समीक्षा करनी शुरू कर दी है, जो पिछले तीन या उससे अधिक वर्षों से एक ही स्थान पर या अपने गृह जिले (होम डिस्ट्रिक्ट) में सेवाएं दे रहे हैं। चुनाव की निष्पक्षता में किसी भी प्रकार की बाधा या आशंका को दूर करने के उद्देश्य से ऐसे सभी अधिकारियों का पूरा रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है, ताकि समय रहते आवश्यक फेरबदल किया जा सके।
राजनीतिक दलों ने भी कसी कमर, जनसभाओं और बैठकों के जरिए जनता के बीच पैठ बनाने में जुटे नेता
दूसरी तरफ, पंजाब की सत्ता और विपक्ष की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने भी आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपनी चुनावी गतिविधियों को बेहद तेज कर दिया है। विभिन्न राजनीतिक दल आम जनता के बीच अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने, अपने सांगतिक ढांचे को जमीनी स्तर पर सक्रिय बनाने तथा योग्य व संभावित उम्मीदवारों के चयन की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। अलग-अलग दलों के दिग्गज नेता ताबड़तोड़ जनसभाओं, रैलियों, नुक्कड़ बैठकों और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों के माध्यम से मतदाताओं तक अपनी पहुंच बनाने की तैयारियों में जुट गए हैं, जिससे राज्य का सियासी पारा गर्माता जा रहा है।





