ब्रेकिंग
केरल के कोच्चि में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी कॉकरोच जनता पार्टी, मुख्य चुना... आरा में रिटायर्ड कस्टम अधिकारी हत्याकांड का मुख्य शूटर मुठभेड़ में घायल, पुलिस ने पैर में मारी गोली झारखंड के खूंटी में दिल दहला देने वाला सड़क हादसा— तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क पर खड़े लोगों को कुचल, 10... महाराष्ट्र के जलगांव में एसीबी का बड़ा एक्शन— 10 हजार की घूस लेते पकड़ा गया अधिकारी, घर और लॉकर से न... देश के मौसम का हाल, उत्तर भारत में बढ़ी ठंड और दक्षिण के इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट भिंड में कमरे का फर्श धंसने से पलंग समेत 16 फीट गहरे गड्ढे में समाई महिला, सिंधिया रियासत के दौर से ... दिल्ली में दिवाली से पहले ही हवा हुई बेहद जहरीली, कई इलाकों में एक्यूआई 450 के पार— गंभीर श्रेणी में... या एसी, टीवी या फ्रिज खरीदते समय क्या एक्सटेंडेड वारंटी लेना सच में फायदेमंद है? जानिए इसके फायदे और... मुंबई के कांदिवली में बुजुर्ग महिला के साथ लूट, परिचित बनकर आया बदमाश गले से सोने की चेन छीनकर फरार उत्तरकाशी के केदारताल एवलांच में जान गंवाने वाली लखनऊ की दो सगी बहनों की दर्दनाक दास्तान, अंतिम सांस...
देश

कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह मनहास ने बताई नक्सलियों की कैद में रहे उन छह दिनों की कहानी, आप भी जानें

सुकमा। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के तर्रेम में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान अगवा किए गए कोबरा के जवान राकेश्वर सिंह मनहास को गुरुवार को छुड़ा लिया गया। जवान मनहास छह दिनों तक नक्सलियों की कैद में रहे। कैद से रिहा होने के बाद उन्होंने इन छह दिनों की कहानी संक्षेप में बताई। राकेश्वर सिंह मनहास ने कहा कि तीन अप्रैल को मुठभेड़ के दौरान वे नक्सलियों के बीच घिर गए थे।

उल्‍लेखनीय है कि तीन अप्रैल को टेकलगुड़ा-जोनागुड़ा गांव के पास सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हुए थे जबकि 30 से अधिक घायल हुए। बकौल मनहास नक्‍सलियों ने उन्‍हें आत्‍मसमर्पण करने के लिए कहा था। समर्पण करने के बाद उनको कहां-कहां ले जाया गया उनको इसकी जानकारी नहीं है। स्थान बदलने के दौरान उनकी आंख पर पट्टी बांध दी जाती थी।

राकेश्वर सिंह मनहास ने बताया कि नक्सली स्थानीय बोली में बात कर रहे थे। उनकी भाषा उन्हें समझ नहीं आ रही थी। नक्सलियों ने मनहास को पकड़ने के बाद पर्चा जारी करके राज्‍य सरकार से इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त करने की मांग की थी। सूत्र बताते हैं कि बस्तर के वयोवृद्ध गांधीवादी कार्यकर्ता धर्मपाल सैनी और गोंडवाना समाज के प्रमुख मुरैया तरेम कुछ स्थानीय लोगों के साथ जंगल गए थे।

वहां बातचीत के बाद नक्सलियों ने जनअदालत लगाकर जवान को रिहा किया। जवान राकेश्वर सिंह मनहास को बाइक से तर्रेम कैंप लाकर सीआरपीएफ के डीआइजी कोमल सिंह को सौंपा गया। नक्सलियों की पामेड़ एरिया कमेटी ने गुरुवार को टेकलमेटा गांव के पास जंगल में 20 गांवों से आदिवासियों को बुलाकर जनअदालत लगाई। भारी भीड़ के बीच नक्सलियों ने जवान को मुठभेड़ के छठे दिन धर्मपाल सैनी के हवाले किया।

बता दें कि 91 वर्षीय धर्मपाल सैनी बस्तर के जाने माने गांधीवादी कार्यकर्ता हैं। आचार्य विनोबा भावे के शिष्य रहे सैनी बस्तर में महिला शिक्षा के लिए सन 1979 से काम कर रहे हैं। उन्होंने बीते चार दशक में माता रुक्मिणी के नाम पर 36 आश्रमशाला खोले हैं। साल 1992 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।

Related Articles

Back to top button