Breaking
गर्लफ्रेंड संग शादी के बंधन में बंधे  ''गुल्लक'' फेम हर्ष मायर, शेयर की तस्वीर हार्दिक और क्रुणाल के साथ दुबई में पार्टी करते नजर आए MS धोनी राज्य सरकार तक पहुंची शिकायत, मुख्यमंत्री भूपेश बोले-ऐसी शिकायत आगे भी मिलीं तो पुलिस कार्रवाई करेगी सरकार के निर्णय पर तय आंदोलन, भूख हड़ताल पर बैठे 12 छात्र बच्चों के लिए लगेंगे आधुनिक झूले, अंतिम बोर्ड बैठक में लिया गया निर्णय | Modern swings will be insta... एसएससी जीडी कांस्टेबल के 20,000 से अधिक पद बढ़े, अब 45,284 पदों पर होगी भर्ती अमृतसर से आए गोताखोरों ने की तलाश, युवक का नहीं चला पता नवंबर माह में औसतन हर रोज मिले 5 मरीज, संख्या पहुंची 207, एक भी एडमिट नहीं शाम को खेलते-खलते दो नाबालिग सगे भाई हुए थे लापता, पीआरवी ने दुर्गापुर रोड टहलते हुए मिले पार्टी हाईकमान जेल से निकलने पर सौंप सकती है बड़ी जिम्मेदारी

आखिर भगवान शंकर को रात्रि ही क्यों प्रिय है? महाशिवरात्रि उपवास का महत्व

भगवान भोलेनाथ इस संसार के पालनहार है. वे अपने भक्तों की सेवा से जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। इनकी कृपा की प्राप्ति करना आसान है. वैसे तो सभी देवताओं का पूजन, व्रत आदि अकसर दिन में ही होते है.

मगर सवाल यह उठता है कि भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए रात्रि का सहरा क्यों लेना पड़ता है. आखिर भगवान शंकर को रात्रि ही क्यों प्रिय है? भगवान शिव संहार शक्ति तमोगुण के अधिष्ठाता हैं, इसलिए तमोमयी रात्रि से उनका लगाव होना स्वाभाविक माना गया है. रात्रि संहार काल की प्रतिनिधित्व करती है, उसके आने से प्रकाश का संहार हो जाता है. कोई जीव जो दिनभर अपना कर्म करते हैं, वह रात्रि में समापन की आरे बढ़ जाती है अंत में निद्रा द्वारा चेतनता ही संहार होकर समयकाल के लिए अचेतन हो जाते हैं.

शिव संहार के देवता है. ऐसे में उनके लिए रात्रि प्रिय है. यही वजह है कि भगवान शंकर की आराधना न केवल इस रात्रि में ही वरन सदैव रात्रि के प्रारंभ होने के पहले यानी प्रदोष काल में होती है. शिवरात्रि का कृष्ण पक्ष में होना भी एक कारण है. शुक्लपक्ष में चंद्रमा पूर्ण बलवान होता है कृष्ण पक्ष में क्षीर्ण कमजोर हो जाता है. चंद्रमा जीवन में रस देने वाला माना गया है. इसलिए ज्योतिष में इसे मन से जोड़ा गया है. इसकी बढ़ोतरी से संसार के संपूर्ण रस से भरे पदार्थों में वृद्धि होती है जब कृष्ण पक्ष में चंद्रमा कमजोर होने लगता है तो जीवन के सांसारिक रसों में कमी आने लगती है पूर्ण क्षीर्णता अमावस्या होती है.

महाशिवरात्रि का उपवास व जागरण क्यों ?

ऋषि महर्षियों ने समस्त आध्यात्मिक अनुष्ठानों में उपवास को अहम बताया है. गीता के अनुसार उपवास विषय निवृत्ति का अचूक साधन है. आध्यात्मिक साधना के लिए उपवास करना जरूरी है. उपवास के साथ रात्रि जागरण का भी महत्व है. उपवास से इन्द्रियों मन पर नियंत्रण करने वाला संयमी शख्स ही रात्रि में जागकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अग्रसर हो सकता है. इन सब कारणों से महारात्रि में उपवास के साथ रात्रि में जागकर शिव पूजा करते हैं.

गर्लफ्रेंड संग शादी के बंधन में बंधे  ”गुल्लक” फेम हर्ष मायर, शेयर की तस्वीर     |     हार्दिक और क्रुणाल के साथ दुबई में पार्टी करते नजर आए MS धोनी     |     राज्य सरकार तक पहुंची शिकायत, मुख्यमंत्री भूपेश बोले-ऐसी शिकायत आगे भी मिलीं तो पुलिस कार्रवाई करेगी     |     सरकार के निर्णय पर तय आंदोलन, भूख हड़ताल पर बैठे 12 छात्र     |     बच्चों के लिए लगेंगे आधुनिक झूले, अंतिम बोर्ड बैठक में लिया गया निर्णय | Modern swings will be installed for children, decision taken in last board meeting     |     एसएससी जीडी कांस्टेबल के 20,000 से अधिक पद बढ़े, अब 45,284 पदों पर होगी भर्ती     |     अमृतसर से आए गोताखोरों ने की तलाश, युवक का नहीं चला पता     |     नवंबर माह में औसतन हर रोज मिले 5 मरीज, संख्या पहुंची 207, एक भी एडमिट नहीं     |     शाम को खेलते-खलते दो नाबालिग सगे भाई हुए थे लापता, पीआरवी ने दुर्गापुर रोड टहलते हुए मिले     |     पार्टी हाईकमान जेल से निकलने पर सौंप सकती है बड़ी जिम्मेदारी     |    

पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 8860606201