नोएडा STF का बड़ा धमाका: 100 करोड़ के ‘GST सिंडिकेट’ का भंडाफोड़, नोएडा से दबोचे गए 4 मास्टरमाइंड

फर्जी कंपनी, फेक इनवॉयस और ई-वे बिल के जरिए 100 करोड़ रुपए से अधिक की जोएसटी चोरी का मामला सामने आया है. नोएडा की एसटीएफ यूनिट ने जीएसटी चोरी के एक बड़े और संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह फर्जी तरीके से देश भर में जीएसटी की चोरी करता था. जांच में सामने आया है कि गिरोह के जरिए अब तक 100 करोड़ रुपए से अधिक सरकारी राजस्व को चुना लगाया है.
एसटीएफ की कार्रवाई के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत दिल्ली-एनसीआर में हड़कंप मच गया है. एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह पहले अलग-अलग राज्यों में फेक फर्मों का पंजीकरण कराता था. इन फर्मों के नाम पर बिना किसी वास्तविक खरीद-फरोख्त के फर्जी सेल्स इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जाते थे. कागजों में बड़े पैमाने पर व्यापार दिखाकर इन फर्जी फर्मों के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट बेचा जाता था.
गिरोह ऐसे करता था जीएसटी की चोरी
फर्जी लेन-देन को असली दिखाने के लिए गिरोह बैंक खातों के जरिए रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करता था. बाद में यह पैसा कैश या सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए निकाल लिया जाता था. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के पास कई कंपनियों के लॉग-इन आईडी, पासवर्ड, ओटीपी एक्सेस और मोबाइल नंबर मौजूद थे, जिससे वह आसानी से बैंक ट्रांजैक्शन और जीएसटी रिटर्न फाइल कर लेते थे. एसटीएफ ने आरोपियों के पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन, आधार कार्ड, ई-मेल आईडी डाटा, जीएसटी पोर्टल लॉग-इन डिटेल और नकद रुपए बरामद किए हैं. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत मिले हैं, जो जीएसटी चोरी की पुष्टि करते हैं.
3 राज्यों में फैला नेटवर्क, मास्टरमाइंड नोएडा से करता था ऑपरेट
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस निवासी दिल्ली, जितेंद्र झा निवासी समस्तीपुर बिहार, पुनीत अग्रवाल निवासी पश्चिमी दिल्ली और शिवम निवासी विजय एन्क्लेव नई दिल्ली के रूप में हुई है. एसटीएफ के अनुसार गिरोह का मास्टरमाइंड हरदीप सिंह है, जो नोएडा से अकाउंट और पूरे नेटवर्क का संचालन करता था.
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने दिल्ली,उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत कई राज्यों में दर्जनों फर्जी फर्में पंजीकृत कराई हैं. इन फर्मों के जरिए करोड़ों रुपए की फर्जी जीएसटी रिटर्न दाखिल की गई. जब पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन की जांच की तो उसमें 30 से अधिक ई-मेल आईडी सामने आई, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग फर्मों के नाम पर किया जा रहा था.
एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआती खुलासा है. जांच आगे बढ़ने पर और फर्जी फर्मों, लाभार्थियों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आ सकते हैं. जीएसटी चोरी में दर्ज अन्य मामलों से भी गिरोह का कनेक्शन जोड़ा जा रहा है.
ऐसे हुआ खुलासा, गिरफ्तार हुए आरोपी
जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों को शुक्रवार को एसटीएफ फील्ड यूनिट नोएडा कार्यालय बुलाया गया था. पूछताछ में जब इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डाटा सामने रखा गया तो 4 आरोपी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार इस गिरोह के खिलाफ जीएसटी विभाग द्वारा पहले से भी कई जिलों में मुकदमे दर्ज हैं.
गाजियाबाद के कविनगर थाना क्षेत्र में दर्ज मामलों की विवेचना के दौरान भी एसटीएफ की तकनीकी मदद ली गई थी. एसटीएफ का कहना है कि यह नेटवर्क अभी पूरी तरह उजागर नहीं हुआ है. एसटीएफ पूरे मामले की जांच कर रही है.






