Bastar Driver Sangh News: ड्राइवरों की मांगों को लेकर संयुक्त ड्राइवर संघ का बड़ा ऐलान, राशन और पेट्रोल परिवहन पर पड़ेगा असर

बस्तर: अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर शासन-प्रशासन को कई बार लिखित ज्ञापन सौंपने के बावजूद कोई ठोस समाधान न मिलने पर अब छत्तीसगढ़ के चालकों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। राज्यभर में आगामी 12 नवंबर से सभी कमर्शियल और निजी वाहन चालक ‘स्टेयरिंग छोड़ो आंदोलन’ के तहत अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने वाले हैं। इस संभावित बड़े आंदोलन की तैयारियां बस्तर संभाग में भी बेहद जोरों-शोरों से चल रही हैं, जिसे लेकर रविवार को ड्राइवर संघ की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी ने एकजुट होकर अपनी कड़ी नाराजगी और मांगें पूरी करने का संकल्प दोहराया है।
हड़ताल के कारण बस्तर सहित पूरे राज्य में जनजीवन प्रभावित होने के आसार, परिवहन और राशन वितरण पर पड़ेगा सीधा असर
ड्राइवरों के इस देशव्यापी और राज्यस्तरीय संयुक्त आंदोलन के चलते आने वाले दिनों में बस्तर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में गंभीर परेशानियां खड़ी होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। संयुक्त ड्राइवर संघ की इस अनिश्चितकालीन हड़ताल की वजह से आवश्यक वस्तुओं की राशन वितरण प्रणाली, स्थानीय सब्जी बाजारों में माल की आवर्ती, पेट्रोल-डीजल का परिवहन, खनिज संपदा ढोने वाले वाहन, यात्री बसों का संचालन और शासकीय कार्यों से जुड़े वाहनों की आवाजाही जैसे कई अति-महत्वपूर्ण कार्य बुरी तरह से बाधित हो सकते हैं।
राजधानी रायपुर में हुई संयुक्त बैठक में लिया गया बड़ा फैसला, शासन-प्रशासन के आश्वासनों के बाद भी मांगें रहीं अनसुनी
लोकल ड्राइवर संघ के संभागीय अध्यक्ष दुर्जनराम नाग ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि पूर्व में ड्राइवर संघ द्वारा ड्राइवर आयोग के गठन, ड्राइवर वेलफेयर बोर्ड की स्थापना और ‘ड्राइवर दिवस’ मनाए जाने जैसी तमाम जायज मांगों को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया था। उस दौरान शासन और प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मांगें जल्द पूरी किए जाने का आश्वासन दिया गया था, जिसके बाद हड़ताल को स्थगित कर दिया गया था। हालांकि, लंबा समय बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकला। इसी बात से आहत होकर राजधानी रायपुर में जॉइंट कमेटी के बैनर तले प्रदेश के सभी 33 जिलों के ड्राइवर संघ पदाधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई, जिसमें यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि समय रहते मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो आगामी 12 नवंबर से ड्राइवर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
जंतर-मंतर तक गूंज चुकी है ड्राइवरों की आवाज, उत्पीड़न और झूठे मु मामलों में फंसाए जाने से चालकों में भारी रोष
ड्राइवर संघ का कहना है कि देश की रीढ़ माने जाने वाले चालकों को हर कदम पर प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। सड़क पर दुर्घटना होने पर बिना किसी निष्पक्ष जांच के सीधे तौर पर ड्राइवर को ही दोषी करार देकर उसके साथ मारपीट की घटनाएं सामने आती हैं। इसके अलावा रास्तों में असामाजिक तत्वों और गुंडों द्वारा उत्पीड़न का सामना भी करना पड़ता है। इन गंभीर मुद्दों को लेकर देश के 28 राज्यों के चालकों ने पूर्व में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी धरना-प्रदर्शन किया था, लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, जिसके चलते उन्हें मजबूरन अपने अधिकारों के लिए एकजुट होना पड़ रहा है।
जिला प्रशासन और ट्रांसपोर्टरों को भेजा गया पत्राचार, दुर्घटना की स्थिति में उचित मुआवजे और सुरक्षा की उठी जोरदार मांग
जिला महासचिव नलसिंग नाग ने बताया कि अपनी सूत्रीय मांगों और आगामी 12 नवंबर के इस बड़े आंदोलन के संबंध में बस्तर जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, परिवहन विभाग के अधिकारियों, लोकल ट्रांसपोर्ट यूनियन और तमाम ट्रांसपोर्टर्स को आधिकारिक रूप से पत्राचार कर सूचित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अधिकांश ड्राइवर आर्थिक रूप से बेहद कमजोर और गरीब वर्ग से आते हैं। सफर के दौरान किसी दुर्घटना में ड्राइवर की मृत्यु हो जाने पर न तो शासन-प्रशासन और न ही वाहन मालिक उनके परिजनों की सुध लेते हैं। संघ की प्रमुख मांग है कि अन्य पेशवरों की तरह सड़क हादसों में घायल होने या जान गंवाने वाले चालकों के आश्रितों को भी उचित मुआवजा राशि और आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
दिन-रात लगातार गाड़ी चलाने की मजबूरी और ड्यूटी के घंटे तय करने की मांग, बीजापुर बस हादसे पर भी जताई चिंता
संभागीय अध्यक्ष ने बीजापुर बस पलटने की हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वाहन चालकों को अक्सर 24-24 घंटे लगातार बिना पर्याप्त विश्राम के गाड़ियां चलानी पड़ती हैं, क्योंकि वाहन मालिक उन पर दबाव बनाकर अधिक काम लेते हैं। ड्राइवरों के काम करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं है, जिसके कारण अत्यधिक थकान के चलते कई बार भीषण सड़क हादसे हो जाते हैं। संघ ने मांग की है कि शासन-प्रशासन द्वारा चालकों की दैनिक ड्यूटी केवल 8 घंटे ही तय की जाए, ताकि सड़क सुरक्षा और चालकों का स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रह सकें।





