धार्मिक
संतों के दोहे

संत ज्ञान,तप,योग से,रचते जीवन-सार।
राह दिखा,आलोक दें,परे करें अँधियार।।
संत नित्य ही निष्कलुष,सदा आचरण नेक।
कर्म,सत्य को मानकर,साधें प्रखर विवेक।।
संत करें नित साधना,शुभ-मंगल का मान।
जहाँ संत होता वहाँ,हर दुर्गुण का अवसान।।
संत आचरण से…