RSS Executive Meeting Indore: इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठक शुरू, यूजीसी के नए नियमों और सामाजिक समरसता पर चर्चा

इंदौर: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के बहुचर्चित ‘इक्विटी रेगुलेशन, 2026’ को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपना रुख एक बार फिर पूरी तरह साफ कर दिया है। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के अनुसार, संघ का स्पष्ट मानना है कि यूजीसी का यह परिपत्र (सर्कुलर) ‘असंतुलित’ प्रकृति का था, जिससे देश की सामाजिक एकता और आपसी संतुलन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता था। आंबेकर ने यह बात इंदौर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस विषय पर संघ पहले ही अपना आधिकारिक पक्ष रख चुका है, और वर्तमान में सरकार द्वारा इस पर रोक लगाए जाने के साथ ही यह मामला माननीय न्यायालय में भी विचाराधीन है।
‘भविष्य के निर्णय पूरी तरह निष्पक्ष और संतुलित होने चाहिए’, सुनील आंबेकर ने सभी हितधारकों की चिंताओं को ध्यान में रखने पर दिया जोर
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आगे बोलते हुए सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ का यह दृढ़ विश्वास है कि इस मामले में आगे जो भी निर्णय लिए जाएं, वे पूरी तरह निष्पक्ष, संतुलित और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाले होने चाहिए। सरकार को यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि सभी संबंधित हितधारकों की वाजिब चिंताओं पर उचित ध्यान दिया जाए और अदालत के समक्ष भी इसी रुख को निरंतर कायम रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर आगे की वास्तविक स्थिति सर्वोच्च न्यायालय की आगामी न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। संघ का मानना है कि भविष्य में ऐसे किसी भी नियम या सर्कुलर के कारण समाज में किसी प्रकार का बिखराव नहीं आना चाहिए।
क्या है पूरा मामला: यूजीसी के 2026 के नए इक्विटी रेगुलेशन और समता समितियों के गठन से जुड़े प्रावधान
गौरतलब है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इन नए नियमों को लेकर देश भर में भारी विरोध और कानूनी विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई थी। आयोग ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को पूरी तरह रोकने और समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 13 जनवरी 2026 को इन नियमों को अधिसूचित किया था। इसके तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा के दायरे में शामिल किया गया था। नियमों के अनुसार तमाम उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए यह अनिवार्य किया गया था कि वे शिकायतों की जांच और समानता को बढ़ावा देने के वास्ते ‘समता समितियां’ और ‘समान अवसर प्रकोष्ठ’ गठित करें, जिसमें विभिन्न वर्गों और महिलाओं के प्रतिनिधित्व का प्रावधान था।
नियमों के दुरुपयोग की आशंका और सुप्रीम कोर्ट द्वारा कार्यान्वयन पर लगाई गई रोक
दूसरी ओर, सामान्य वर्ग के विभिन्न संगठनों, छात्रों और राजनेताओं का यह तर्क रहा है कि इन नए नियमों में सामान्य वर्ग के हितों के संरक्षण का स्पष्ट अभाव है। झूठी या बिना किसी ठोस सबूत की शिकायतों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान न होने के कारण इनके बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही थी। बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और दायर याचिकाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गत 29 जनवरी 2026 को इन नए नियमों के कार्यान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी थी, क्योंकि अदालत का यह मानना था कि प्रथम दृष्टया ये नियम अस्पष्ट प्रतीत होते हैं।
संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल की बैठक में संगठनात्मक गतिविधियों और शताब्दी वर्ष पर हो रही है चर्चा
इस बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल की महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया जा रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत सहित देश भर के 46 प्रांतों के पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता सम्मिलित हो रहे हैं। इस बैठक के दौरान संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत अब तक आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ-साथ आगामी संगठनात्मक योजनाओं और महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जा रहा है।





