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भारत के साथ व्यापार रोक कर पछताएगा PAK, अपने पैर पर खुद मारी कुल्हाड़ी

नई दिल्लीः अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से पाकिस्तान की बौखलाहट देखने लायक है। अपनी सरजमीं पर बैठे पाकिस्तान के सरगना सिर्फ अपने हाथ मल रहे हैं और अब ऐसे-ऐसे फैसले कर रहे हैं कि वो अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। कश्मीर मुद्दे पर फैसले के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ राजनयिक संबंध खत्म किये और साथ ही  द्विपक्षीय व्यापार पर भी रोक लगा दी है। हालांकि पाकिस्तान का ये फैसला सेल्फ गोल जैसा ही है। इससे भारत को तो कम नुकसान होगा, लेकिन पाकिस्तान की जनता इससे काफी परेशान होगी। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान के नागरिकों पर ही पड़ेगा।

असल में भारत के साथ वह पहले से ही व्यापार घाटे में था और अब यह अंतर बहुत बढ़ गया था। इसके अलावा खुद भारत ने अप्रैल से एलओसी ट्रेड को बंद कर रखा है। इस वजह से पाकिस्तान बौखलाहट में व्यापारिक रिश्ते तोड़ने का दम भर रहा है। इमरान सरकार का यह कदम केवल पाकिस्तानी जनता को गुमराह करने के लिए एक हथकंडा है।

सच्चाई यह है कि भारत का पाकिस्तान के साथ नाममात्र का व्यापार होता है, भारत के कुल व्यापार का आधा परसेंट से भी कम व्यापार पाकिस्तान से होता है। पाकिस्तान से जो भी चीजें आती हैं, उन पर भारत ने 200 परसेंट की ड्यूटी लगा रखी है। यानी इसमें इमरान खान का ही घाटा है, भारत का कुछ भी नहीं जाता है।

कश्मीर मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने की धमकी देने वाले पाकिस्तान के साथ भारत के व्यापार पर नजर डालें तो स्थिति साफ होती है कि व्यापार के मामले में पाकिस्तान भारत के आगे कहीं नहीं ठहरता है। 2017 में भारत जहां दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश था वहीं 2018-19 में जीडीपी के आधार पर पाकिस्तान 39वें पायदान पर था, हालांकि 2019 में भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट आई और वह पांचवें से सातवें स्थान पर खिसक गया।

14 फरवरी को पुलवामा में आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के राजनीतिक और व्यापारिक रिश्तों में आई खटास से पहले के 9 महीने (जुलाई 2018 से जनवरी 2019) के द्विपक्षीय व्यापार पर नजर डाली जाए तो दोनों देशों के बीच व्यापार 1.122 बिलियन डॉलर बढ़ गया था जिसमें पिछले साल इसी अवधि की तुलना में 4.96 फीसदी यानी 1.069 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी देखी गई।

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